डिजिटल युग में बच्चे (Childrens in the digital world)

डिजिटलीकरण ने अपने और अन्य लोगों के प्रति बच्चों के व्यवहार एवं कार्य शैली को गंभीर रूप से परिवर्तित कर दिया है। ये परिवर्तन सकारात्मक और नकारात्मक दोनों रूपों में देखे जा सकते हैं। इनमें प्रमुख परिवर्तन निम्नलिखित हैं

  • डिजिटल उपकरणों पर अत्यधिक समय बिताना। कुछ शोधों में उल्लिखित है कि इसके कारण शारीरिक गतिविधियों को कम
    समय दिया जा रहा है।
  • एक नए पीढ़ी अन्तराल का सृजन हुआ है जिसके परिणामस्वरूप जहाँ वयस्क, बच्चों पर प्रौद्योगिकी के नकारात्मक प्रभाव से
    डरते हैं, वहीं बच्चे यह मानते हैं कि वयस्क अवसरों का लाभ उठाने में विफल हो रहे हैं।
  • सोशल मीडिया के कारण मित्रता के आयाम में परिवर्तन हुआ है। इसके कारण मित्रता में निष्क्रियता आयी है तथा परस्पर
    मिलने की प्रवृत्ति कम हो गयी है। इसने डिजिटल निर्भरता, मस्तिष्क और मष्तिष्क की संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं पर पड़ने वाले प्रभाव के संबंध में एक नई बहस को जन्म दिया है।
  • इसने एक नए मुद्दे को जन्म दिया है कि मशीनों पर भरोसा किया जा सकता है या नहीं।

UNICEF द्वारा ‘स्टेट ऑफ़ वर्ल्डस चिल्ड्रेन रिपोर्ट : चिल्ड्रेन इन द डिजिटल वर्ल्ड 2017’ नामक एक रिपोर्ट जारी की गई है। इसमें चर्चा की गई है कि:

  • बच्चों के जीवन के अनुभवों को आकार देने के लिए डिजिटलीकरण की क्षमता बच्चों के बढ़ने के साथ बढ़ती जाती है, जो उन्हें असीमित अवसर प्रदान करती है।
  • उसी समय, प्रौद्योगिकी तक पहुंच का अभाव बच्चों और विभिन्न अन्य समूहों के मध्य वंचन की भावना उत्पन्न करता है। इससे वे सुविधाहीनता और निर्धनता के अंतरपीढ़ीगत चक्र के प्रति सुभेद्य बन जाते हैं।
  • यह रिपोर्ट डिजिटल युग के अवसरों से सभी बच्चों को लाभान्वित किये जाने के साथ ही बच्चों को एक अतिसंबद्ध विश्व के
    नकारात्मक प्रभावों से संरक्षण प्रदान करने हेतु त्वरित कार्यवाही, लक्षित निवेश और व्यापक सहयोग की अनुशंसा करती है।

डिजिटलीकरण से प्राप्त होने वाले अवसर:

  • बेहतर शिक्षा के अवसरों तक पहुंच – इससे बच्चों को ई-लर्निग में भाग लेने और शैक्षणिक और अध्ययन सामग्री की विस्तृत
    श्रृंखला तक पहुंच प्राप्त होती है। शिक्षा के भौगोलिक विस्तार में भी वृद्धि हुई है।
  • व्यक्तिगत अनुभव (personalized experience) के रूप में शिक्षा- इसने छात्रों को उनकी स्वयं की अभिरुचि के अनुसार सीखने में मदद की है और विद्यार्थियों को अध्ययन के बेहतर विकल्प प्रदान करने में सीमित संसाधनों वाले शिक्षकों की सहायता की है।
  • बेहतर परिणामों के लिए शिक्षक प्रशिक्षण- शिक्षा का मिश्रित प्रारूप, जहां श्रेष्ठ शिक्षकों द्वारा सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) का समर्थन किया जाता है, अध्ययन परिणामों को बढ़ावा दे सकता है। ऐसे क्षेत्रों में जहाँ डिजिटल कनेक्टिविटी अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं वहां शिक्षकों के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आवश्यक है।
  • सोशल मीडिया सक्रियता और समग्र एकीकरण- बच्चे ब्लॉगिंग के माध्यम से अपने विचार अभिव्यक्त करने में सक्षम हुए हैं, उदाहरण के लिए- मलाला यूसुफज़ई। इसने अल्पसंख्यक समूहों को अपने समुदायों में एकीकृत महसूस करने में सहायता की है। और अभिव्यक्ति, नेटवर्किंग, राजनीतिक सक्रियता और सामाजिक समावेश के लिए नए अवसर प्रदान किए हैं।
  • रोज़गार योग्यता में सुधार – यह बेहतर शैक्षणिक अवसरों के साथ-साथ प्रशिक्षण और कौशल सुधार कार्यक्रमों के माध्यम से रोजगार क्षमता में सुधार करता है।
  • दिव्यांग बच्चों के लिए अवसरों की उपलब्धता – मोबाइल एप्लिकेशन दिव्यांग बच्चों और युवाओं को अधिक सक्षम एवं स्वतंत्र
    होने में सहायता दे सकते हैं।

डिजिटल डिवाइड से संबंधित मुद्दे

  • डिजिटल विभाजन (digital divide) अमीर और गरीब, पुरुषों और महिलाओं, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों, शिक्षित और
    अशिक्षित लोगों के मध्य सामाजिक-आर्थिक विभाजन को प्रदर्शित करता है।
  • आर्थिक असमानता- विकसित देशों में इंटरनेट का प्रयोग विकासशील देशों की तुलना में दोगुना है और अल्प विकसित देशों की तुलना में तो यह और भी अधिक है।-

विभिन्न देशों के मध्य व्याप्त ये असमानताएं उपरोक्त वर्णित अवसरों तक पहुंच को बाधित करके डिजिटल युग की विभिन्न मांगों से वंचित बच्चों के लिए विद्यमान असमानताओं को अधिक व्यापक बना सकती हैं।

  • द्वितीयक डिजिटल विभाजन- हालाँकि पहुँच का प्राथमिक डिजिटल विभाजन कम हुआ है, किन्तु डिजिटल कौशल और
    उपयोग में बढ़ती असमानता के आधार पर डिजिटल विभाजन द्वितीय स्तर के विभाजन में परिवर्तित हो सकता है।
  • यद्यपि जीरो-रेटिंग (zero rating sites) साइट्स ने ग्राहकों की डेटा सीमा से कुछ साइट्स को छूट प्रदान की है, किन्तु उन्होंने संबंधित चिंताओं को भी उत्पन्न किया है। जैसे इससे एक समावेशी इंटरनेट के विकास के बजाय लोगों द्वारा केवल पोस्ट और चित्र अपलोड करने के लिए प्रयोग किये जाने वाले इंटरनेट का विकास हो सकता है। इस स्थिति में प्रौद्योगिकी का उसकी पूरी क्षमता के साथ उपयोग नहीं किया जा सकेगा।
  • देशी भाषा में ऑनलाइन उपयोगी सामग्री का अभाव- इससे इन्टरनेट की सुलभता में कमी आती है, बहुत से लोग इंटरनेट उपयोग के प्रति हतोत्साहित होते हैं और ज्ञान-अंतराल में वृद्धि होती है।

इससे संबंधित जोखिमों को निम्नलिखित रूपों में वर्गीकृत किया गया है

  • सामग्री (content) से संबंधित जोखिम- कोई भी बच्चा अवांछित और अनुचित सामग्री के संपर्क में आ सकता है। इसमें यौन, अश्लील और हिंसक छवियां आदि शामिल हो सकती हैं।
  • संपर्क से संबंधित जोखिम- कोई भी बच्चा जोखिमपूर्ण संचार में भाग ले सकता है, जैसे किसी वयस्क के साथ अनुचित संपर्क या यौन उद्देश्यों के लिए बच्चे से आग्रह किया जाना, या किसी व्यक्ति विशेष द्वारा किसी बच्चे को उग्र बनाने का प्रयास करना आदि।
  • आचरण संबंधित जोखिम- खतरनाक सामग्री या संपर्क बच्चे को नकारात्मक व्यवहार करने के लिए उकसा सकता है। इसमें बच्चों द्वारा अन्य बच्चों के बारे में घृणास्पद सामग्री लिखना या बनाना, जातिवाद प्रसारित करना, आपतिजनक बातें या चित्र पोस्ट करना आदि शामिल हो सकते हैं।

डिजिटलीकरण से संबंधित चिंताएं :

डिजिटल कनेक्टिविटी ने: -असुरक्षित सोशल मीडिया प्रोफाइल के माध्यम से बच्चों तक पहुँच को और अधिक सुलभ बना दिया है,

अपराधी को अनामिता और अपने नेटवर्क में प्रसार करने की सुविधा दी है तथा उनकी पहचान और अभियोजन के जोखिमों
को कम किया है।

प्रमुख जोखिम निम्नलिखित हैं:

  • साइबर धमकी (Cyberbullying) को कंप्यूटर, सेल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के उपयोग के माध्यम से “जानबूझकर, बार-बार पहुँचायी जाने वाली हानि के रूप में परिभाषित किया गया है।”
  • पिछली पीढ़ियों में, धमकाये जाने पर बच्चे घर जाकर या अकेले रहकर इस प्रकार के दुर्व्यवहार या उत्पीड़न से बच सकते थे, परन्तु डिजिटल विश्व में बच्चों के लिए ऐसा कोई सुरक्षित आश्रय मौजूद नहीं है।

ऑनलाइन बाल यौन शोषण और उत्पीड़न- यह निम्नलिखित के माध्यम से बढ़ रहा है:

  • पीयर-टू-पीयर नेटवर्क (पी 2 पी) और डार्क वेब बाल यौन दुर्व्यवहार सामग्री (CSAM) के आदान-प्रदान की सुविधा
    प्रदान करता है। इससे संबंधित नई चुनौतियां भी हैं, जैसे कि बाल यौन दुर्व्यवहार की लाइव स्ट्रीमिंग और स्वयं बनाई
    गई यौन सामग्री, जो CSAM की मात्रा को बढ़ा रहे हैं।
  • बाल दुर्व्यवहार की लाइव स्ट्रीमिंग में बढ़ोत्तरी में योगदान देने वाले अन्य प्रमुख कारकों में आभासी मुद्रा (cryptocurrency) का बढ़ता उपयोग और मीडिया साझा करने के लिए एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म का प्रयोग शामिल हैं।
  • ऑफलाइन सुभेद्यता को प्रतिबिंबित करने वाली ऑनलाइन सुभेद्यता- जो बच्चे ऑफलाइन अधिक सुभेद्य हैं, जैसे लड़कियां, गरीब परिवारों के बच्चे आदि वे ऑनलाइन भी अधिक सुभेद्य हैं।

ऐसे उत्पीड़न को रोकने के लिए उठाए गए कुछ महत्वपूर्ण कदम:

वी प्रोटेक्ट (WePROTECT) एक वैश्विक गठबंधन है जो ऑनलाइन बाल यौन शोषण को समाप्त करने हेतु बनाया गया है। अग्रणी प्रौद्योगिकी कंपनियों, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों और 77 देशों ने समेकित प्रतिक्रिया के माध्यम से बाल यौन उत्पीड़न और शोषण को समाप्त करने के लिए तत्काल प्रतिबद्धता प्रदर्शित की है।

इंटरनेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटड चिल्ड्रेन को माइक्रोसॉफ्ट ने अपनी Photo-DNA तकनीक प्रदान की है।

आगे की राह

इंटरनेट सबसे उत्तम और सबसे निकृष्ट मानव प्रकृति को प्रतिबिंबित करता है और इसमें वृद्धि करता है। यह एक ऐसा उपकरण है जिसका प्रयोग सदैव सकारात्मक और नकारात्मक दोनों उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। हमारा लक्ष्य इससे होने वाली हानियों को कम करना और डिजिटल प्रौद्योगिकी के संभावित अवसरों का विस्तार करना है।

अवसरों का लाभ उठाने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जाने की आवश्यकता है:

  • सभी बच्चों को उच्च गुणवत्ता युक्त ऑनलाइन संसाधनों तक वहनीय पहुंच प्रदान करना।
  • बच्चों को उचित मार्गदर्शन प्रदान कर ऑनलाइन हानि से बचाना।
  • बच्चों की निजता की रक्षा करना।
  • बच्चों को ऑनलाइन जगत में सूचित (इन्फॉम्र्ड), संलग्न (इंगेज़्ड) और सुरक्षित (सेफ) बनाये रखने हेतु डिजिटल रूप से साक्षर बनाना।
  • नैतिक मानकों और प्रक्रियाओं को विकसित करने हेतु निजी क्षेत्र की शक्ति का लाभ उठाना जो बच्चों को ऑनलाइन सुरक्षा और लाभ पहुंचाए।
  • बच्चों को डिजिटल नीति के केंद्र में रखना।

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