डेवलपमेंट इम्पैक्ट बॉन्ड (Development Impact Bonds)

शिक्षा पर केंद्रित विश्व के पहले डेवलपमेंट इम्पैक्ट बॉन्ड (DIB) ने परिणामों के सन्दर्भ में महत्त्वपूर्ण उपलब्धि प्राप्त की है। यह बॉन्ड भारत में लड़कियों की शिक्षा व्यवस्था में सुधार हेतु एक हस्तक्षेप पर आधारित है।

सोशल इम्पैक्ट बॉन्ड और डेवलपमेंट इम्पैक्ट बॉन्ड क्या हैं?

  • सोशल इंपैक्ट बॉन्ड (SIB) एक वित्त पोषण तंत्र हैं जिसके अंतर्गत सरकार सामाजिक सेवा प्रदाताओं यथा NGOs एवं
    निवेशक आदि के साथ समझौते करती है तथा पूर्व घोषित सामाजिक परिणामों की प्राप्ति के आधार पर भुगतान करती है। (OECD, 2015)।
  • डेवलपमेंट इंपैक्ट बॉन्ड (DIB) सोशल इंपैक्ट बॉन्ड (SIB) का एक प्रकार है एवं यह इससे परिणाम-आधारित वित्त पोषण के आधार भिन्न होता है।
  • SIB के लिए परिणाम-आधारित वित्त पोषक सरकार है। वहीं DIB के लिए प्रायः किसी सहायता एजेंसी अथवा किसी अन्य परोपकारी वित्तपोषक द्वारा निधि की व्यवस्था की जाती है।
  • SIB को ‘सफलता के लिए भुगतान’ मॉडल के रूप में अभिव्यक्त किया जाता है और इसके माध्यम से परिणाम-आधारित वित्त
    पोषण अथवा प्रदर्शन-आधारित भुगतान प्रणाली को औपचारिक रूप प्रदान किया जाता है।

संबंधित तथ्य:

  • वर्ष 2010 में यूनाइटेड किंगडम (UK) द्वारा प्रथम SIB आरम्भ किया गया जिसका उद्देश्य सज़ा प्राप्त अपराधी द्वारा पुनः
    अपराध करने की प्रवृत्ति को कम करना था।
  • SIB / DIB में विभिन्न शेयरधारक सम्मिलित हैं : परिणाम केंद्रित वित्त प्रदाता (सरकार / दाता एजेंसी), परियोजना के
    प्रायोजक, निवेशक, गारंटी प्रदाता, सेवा प्रदाता ,मूल्यांकनकर्ता एवं लाभार्थी।

भारत में अन्य इंपैक्ट बॉन्ड

उत्कर्ष इम्पैक्ट बॉन्ड

  • यूनाइटेड स्टेट्स एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (USAID) द्वारा प्रारंभ किया गया।
  • यह स्वास्थ्य देखभाल के लिए विश्व का पहला डेवलपमेंट इंपैक्ट बॉन्ड (DIB) है।
  • लक्ष्य: प्रसव काल के दौरान 600,000 गर्भवती महिलाओं तक पहुंच स्थापित करना और उन्हें बेहतर देखभाल उपलब्ध करवाना तथा आगामी पांच वर्षों में 10,000 महिलाओं एवं नवजात शिशुओं के जीवन की सुरक्षा को सुनिश्चित करना।

इंपैक्ट बॉन्ड कैसे कार्य करते हैं?

आकलन: शिक्षा के लिए डेवलपमेंट इंपैक्ट बॉन्ड (DIB)

  • इंपैक्ट बॉन्ड का मूल्यांकन दो मैट्रिक्स के आधार पर किया गया: छात्र नामांकन दर और अधिगम संबंधी परिणाम।
  • नामांकन दर: प्रथम वर्ष में इस पहल ने अपने लक्ष्य का लगभग 50% प्राप्त कर लिया था। इस दौरान स्कूल से वंचित (आउटऑफ़-द-स्कूल) 38 प्रतिशत छात्राओं का नामांकन कराया गया। वहीं द्वितीय वर्ष में 73 प्रतिशत नामांकन दर प्राप्त कर यह पहल 79 प्रतिशत के अपने लक्ष्य के अत्यंत निकट पहुंच गई।
  • अधिगम संबंधी परिणाम: इसका मूल्यांकन ASER परीक्षण के आधार पर किया गया था। अधिगम संबंधी परिणाम के आधार पर केवल 52 प्रतिशत का लक्ष्य प्राप्त किया गया है, किन्तु पिछले वर्ष के अधिगम स्तर की तुलना में अपने लक्ष्य से 160 प्रतिशत से अधिक हासिल किया गया।

इंपैक्ट बॉन्ड किस प्रकार भिन्न हैं?

  • परिणाम प्राप्त होने से पूर्व वित्त अग्रिम रूप से सुलभ करा दिया जाता है।
  • इनका लक्ष्य भौतिक अवसंरचना के विकास के स्थान पर सेवाओं के वितरण में सुधार करना है। (उदाहरण के लिए-बेघर या जेल बंदी, बाल देखभाल, पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण आदि से संबद्ध समर्थन आधारित सेवाएं इत्यादि)।

SIB/DIB के लाभ एवं हानियाँ:

लाभ हानियाँ
  • यह वित्तीय / परिचालन संबंधी जोखिम कम करता है और   सामाजिक-आर्थिक नवाचारों को प्रोत्साहित करता है।
  • सेवा प्रदाताओं के लिए, SIB सेवाओं की आपूर्ति हेतु लिए अग्रिम फंडिंग प्रदान करता है।
  • सुदृढ़ मूल्यांकन पर आधारित निवेश, परियोजनाओं के   डिजाइन एवं वितरण में उच्च मानकों की प्राप्ति में सहायता
    कारण तुलनात्मक रूप अधिक प्रशासनिक लागत की प्रदान करता है।
  • इसके अंतर्गत सत्यापन योग्य मात्रात्मक पैमानों की आवश्यकता होती है अलग-अलग परियोजनाओं के  लिए इनका निर्धारण करना कठिन होता है  एवं इनके  विकास में कई वर्षों का समय लग सकता है।
  • वार्ता, समन्वय एवं कार्यान्वयन की जटिल संरचना के  कारण तुलनात्मक रूप अधिक प्रशासनिक लागत की प्रदान करता है।

चुनौतियां

  • निवेशकों के लिए उच्च जोखिम: SIB एक जोखिम साझा करने वाला तंत्र है। इसके अंतर्गत सरकार परियोजना के कार्यान्वयन
    का जोखिम निजी निवेशकों पर स्थानांतरित कर देती है। ऐसे में अपेक्षित लक्ष्य प्राप्त नहीं होने पर निवेशक अपना निवेश खो
    देते हैं।
  • जोखिम आकलन: अंतर्निहित परियोजना जोखिम प्रत्येक परियोजना के लिए विशिष्ट होते हैं (यथा- प्रौद्योगिकी, सहयोगी
    आदि) एवं इनके सम्पूर्ण मूल्यांकन एवं प्रबंधन की आवश्यकता होती है।
  • अनुचित प्रथाओं का संरक्षण: अपना प्रतिफल सुनिश्चित करने के लिए निवेशक ‘सफलता के निम्न मानकों के लिए मांग और
    लॉबीइंग कर सकते हैं।
  • सामाजिक परियोजना के महत्व को कम करना: निवेशकों के लिए लाभ को प्रोत्साहन के रूप में तय किये जाने के कारण वे
    अधिक राजस्व की प्राप्ति अथवा कम जोखिम के लिए प्रेरित हो सकते हैं तथा सामाजिक प्रभावों से समझौता कर सकते हैं।
  • लोक आयुक्त अथवा मध्यस्थ के लिए परियोजनाओं हेतु निवेशकों को आकर्षित करने की आवश्यकता बनाम अधिक महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य के मध्य चुनाव करने में तथा निवेशकों के लिए वित्तपोषण हेतु उचित SIB का चुनाव करने के सन्दर्भ में
    सामंजस्य स्थापित करना आवश्यक है।
  • लोक-राज्य संबंध: लाभ प्रोत्साहन सेवा प्रदाताओं (सरकार) एवं लाभार्थियों (जनसंख्या) के मध्य संबंधों को नकारात्मक रूप
    से परिवर्तित कर सकता है।
  • निजीकरण: SIB/DIB के आलोचक यह आशंका व्यक्त करते हैं कि महत्वपूर्ण सामाजिक सेवाओं के निजीकरण के लिए इनका
    दुरुपयोग किया जा सकता है।

आगे की राह

  • संतुलित दृष्टिकोण: इंपैक्ट प्रोजेक्ट को उन नयी परियोजनाओं के मध्य संतुलन स्थापित करने लिए संचालित किया जाना चाहिए जिनका समाज पर व्यापक प्रभाव पड़ता है।
  • लक्षित लाभार्थी: लक्षित लाभार्थियों की सही पहचान परिणाम पैमानों को सरल बनाने एवं अधिक केंद्रित तथा प्रभावशाली पहल उपलब्ध कराने में सहयोग प्रदान कर सकती है।
  • भुगतान-परिणाम संबंध: यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि भुगतान प्रत्यक्ष रूप से लक्षित परिणाम से जुड़ा हो (तथा यदि आवश्यकता हो तो दीर्घकालिक परिणाम मूल्यांकन को भी इसमें सम्मिलित किया जाए) इसके अंतर्गत यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि वास्तविक रूप से बेहतर परिणामों को पुरस्कृत करने के लिए सही पैमाने उपलब्ध हैं।
  • सरकार की भूमिका: इंपैक्ट प्रोजेक्टों के निर्माताओं को सरकार की भूमिका एवं अनुबंध की समाप्ति के पश्चात परिणामों के स्थायित्व के बारे में सावधानी से विचार करने की आवश्यकता है।

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Thanks for visiting IASbook