पाकिस्तान के खिलाफ आतंकवाद पर अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंध (International Sanctions Against Pakistan on Terrorism)

  • फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स ने पाकिस्तान को अपनी आतंक-वित्तपोषण निगरानी सूची (वाच लिस्ट) या “ग्रे सूची”
    में स्थान दिया है।
  • अमेरिका ने हाल ही में पाकिस्तान को ‘स्पेशल वॉच लिस्ट’ में रखा है तथा उसे दी जाने वाली 1.15 अरब अमेरिकी डॉलर की सैन्य सहायता पर भी रोक लगा दी है। साथ ही इसने अन्य 10 देशों को ‘विशेष संवेदनशील देश’ (Countries of Particular Concern: CPC) के रूप में पुनः नामित करने की भी घोषणा की है।
  • भारत ने पाकिस्तान को उन सार्क सदस्य देशों की सूची से बाहर कर दिया है जिनके साथ भविष्य में यह अपने राष्ट्रीय ज्ञान नेटवर्क
    (NKN) को संयोजित करने वाला है।

FATF (फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स)

  • यह 1989 में स्थापित एक अंतर सरकारी निकाय है। इसका सचिवालय पेरिस स्थित OECD मुख्यालय में है।
  • वर्तमान में इसके 37 सदस्य हैं और भारत भी इसका एक सदस्य है।
  • इसका उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय तंत्र के समक्ष उत्पन्न मनी लॉन्डरिंग, आतंकवाद के वित्तपोषण और अन्य खतरों से निपटने के लिए मानक निर्धारित करना तथा कानूनी, नियामक एवं परिचालनात्मक उपायों के प्रभावी कार्यान्वयन को बढ़ावा देना है।

राष्ट्रीय ज्ञान नेटवर्क (NKN):

  • राष्ट्रीय ज्ञान नेटवर्क को राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के साथ 2010 में एक कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में आरम्भ किया गया था।
  • इसका उद्देश्य ज्ञान साझाकरण और सहयोग आधारित शोध की सुविधा के लिए उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान के सभी संस्थानों को उच्च गति युक्त डाटा संचार नेटवर्क के माध्यम से एक-दूसरे से जोड़ना है।
  • NKN इंजीनियरिंग, विज्ञान, चिकित्सा इत्यादि विशेष क्षेत्रों में उन्नत दूरस्थ शिक्षा की सुविधा प्रदान करेगा और साथ ही अत्यधिक
    उच्च गति डेटा आधारित ई-गवर्नेस को मजबूत आधार प्रदान करेगा।
  • यह देश में मौजूदा ज्ञान अंतराल को समाप्त करने का कार्य करेगा और देश को ज्ञान आधारित समाज के रूप में विकसित करने में
    मदद करेगा। इसके साथ ही यह ज्ञान क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देगा।
  • यह TEIN4 जैसे अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक नेटवर्को और CERN जैसे संगठनों के शोधकर्ताओं के मध्य सहयोग को सक्षम बनाता है।

अन्य संबंधित तथ्य

  • किसी देश को “ग्रे सूची” में रखने का अर्थ उसके विरुद्ध प्रत्यक्ष कानूनी या दंडात्मक कार्यवाही करना नहीं है, अपितु इस सूची में रखे जाने के फलस्वरूप वित्तीय प्रहरियों (वाचडॉग्स), नियामकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा उस देश की जांच-पड़ताल में वृद्धि हो जाती
  • 2010 में एशिया प्रशांत समूह (APG) द्वारा किए गए विस्तृत मूल्यांकन और आतंकवादी वित्तपोषण को रोकने के लिए इस्लामाबाद द्वारा आवश्यक कार्रवाई न किए जाने के कारण पाकिस्तान को 2012 से 2015 तक FATF की ‘ग्रे सूची’ में रखा गया था।
  • पाकिस्तान को मई 2018 तक आतंकवाद के वित्तपोषण और मनी लॉन्डरिंग को रोकने हेतु एक कार्य-योजना FATF को सौंपने के लिए कहा गया था।
  • FATF ने पाकिस्तान द्वारा प्रस्तुत एक्शन प्लान को जून 2018 में अनुमति प्रदान कर दी और एक औपचारिक घोषणा द्वारा पकिस्तान को ग्रे-लिस्ट में डाल दिया। ध्यातव्य है कि यदि इस्लामाबाद इस सम्बन्ध में कोई कार्य-योजना प्रस्तुत करने में असफल रहता या FATF द्वारा उस कार्य-योजना को अस्वीकृत कर दिया गया होता तो पाकिस्तान को उत्तर कोरिया और ईरान के साथ समूह की ब्लैकलिस्ट या “गैर सहयोगी देशों या क्षेत्रों” (NCCTs) की सूची में रखा जा सकता था।
  • पाकिस्तान द्वारा सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1267 की सैक्शन्स कमिटी (यह तालिबान से जुड़े समूहों जैसे कि लश्कर-ए-तैयबा, जैशए-मोहम्मद और हक्कानी नेटवर्क की निगरानी करती है) द्वारा प्रतिबंधित समूहों पर कड़ी कार्यवाही करने से संबंधित अपने दायित्वों का स्पष्ट उल्लंघन किया गया था। पाकिस्तान द्वारा किये गए उल्लंघन को देखते हुए यह निर्णय काफी समय से लंबित था।

‘स्पेशल वाच लिस्ट’ के बारे में

यह उन देशों के लिए है जो धार्मिक स्वतंत्रता के गंभीर उल्लंघन में शामिल हैं या उन्हें रोकने का प्रयास नहीं करते हैं, परन्तु ‘कन्ट्रीज
ऑफ़ पर्टिकुलर कंसर्न (CPC)’ के स्तर तक नहीं पहुंचे हैं।

CPC के बारे में

  • धार्मिक स्वतंत्रता के विरुद्ध व्यवस्थित रूप से चल रहे गंभीर उल्लंघन के मामलों में संलग्न होने या उन्हें रोकने का प्रयास न करने
    वाले देशों को CPC की सूची में शामिल किया जाता है। यह 1998 के अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के अनुरूप है।
  • इस सूची में बर्मा, चीन, इरीट्रिया, ईरान, उत्तरी कोरिया, सूडान, सऊदी अरब, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज़्बेकिस्तान
    शामिल हैं।

भारत के लिए निहतार्थ

  • इससे भारत के इस दृष्टिकोण को समर्थन मिलता है कि पाकिस्तान अपने क्षेत्र में आतंकवाद को संरक्षण देता है। यह पाकिस्तान द्वारा गैर-पारंपरिक युद्ध के एक तरीके के रूप में आतंकवाद के प्रयोग के सन्दर्भ में भारत द्वारा पाकिस्तान को अंतर्राष्ट्रीय मंचों में अलगथलग किये जाने में सहायता प्रदान करेगा।
  • अमेरिका की अनुपस्थिति से उत्पन्न अंतराल को चीन सरलता से भर सकता है। यह अत्यंत चिंता का विषय है, क्योंकि चीन ने ग्वादर बंदरगाह के विकास और POK से होकर जाने वाले चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) जैसी परियोजनाओं में भारी निवेश करना प्रारम्भ कर दिया है।
  • हालांकि, भारत को अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को दी जाने वाली सैन्य सहायता रोकने को लेकर अति उत्साहित नहीं होना चाहिए क्योंकि यह सैन्य सहायता को रद्द करना नहीं है अपितु यह आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई हेतु पाकिस्तान को प्रोत्साहित करने के लिए एक अस्थायी विकल्प है। इसके साथ ही यह रोक पाकिस्तान की पश्चिमी सीमा पर जारी आतंकवाद को लेकर है, पाकिस्तान की पूर्वी सीमा पर संचालित भारत विरोधी समूहों, जैसे- लश्कर-ए तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद को लेकर यह अभी भी अस्पष्ट है।

निष्कर्ष :

  • पाकिस्तान को नियंत्रित करने के भारतीय प्रयास अत्यंत कम लाभप्रद सिद्ध हुए हैं। इसके साथ ही भारत शक्ति प्राप्त करने के संदर्भ में अमेरिका के साथ एक सुदृढ़ रणनीतिक साझेदारी स्थापित करने और दिल्ली की स्थिति मजबूत करने में भी असफल रहा है। हालाँकि
    9/11 के बाद अमेरिका द्वारा भारत को वाशिंगटन में सैन्य अड्डा बनाने के निमंत्रण दिए एक दशक से अधिक समय बीत चुका है तथापि भारत ने अमेरिका से अभी भी दूरी बनाए रखी है।
  • इस प्रकार आरंभ से ही भारतीय प्रयासों के मिश्रित परिणाम ही प्राप्त हुए हैं। हालाँकि यह कहा जा सकता है कि अभी भी दोनों पक्षों में बेहतर संबंधों को लेकर आशाएं बनी हुई हैं। पाकिस्तान की तुलना में अधिक सशक्त और स्थिर होने के कारण भारत में इन संबंधों को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाने की क्षमता है।
  • इसके अतिरिक्त, भारत को द्विपक्षीय संबंधों में अपनी कमियों को ध्यान में रखकर किसी भी प्रकार के ऐसे प्रतिक्रियात्मक रुख से बचना चाहिए जो सैन्य कार्यवाही की दिशा में ले जाए क्योंकि विभिन्न कारणों से ऐसी किसी भी कार्यवाही का कार्यान्वयन स्वयं भारत के लिए अत्यधिक कठिन होगा।

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