लिंग संबंधी मुद्दों से निपटने हेतु सरकार द्वारा की गयी हाल की पहले

(Recent Government Initiatives to Tackle with Gender Related Issues)

सुविधा (Suvidha)

हाल ही में, रसायन और उर्वरक मंत्रालय ने प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना के तहत
100% ऑक्सो-बायोडिग्रेडेबल सैनिटरी नैपकिन लॉन्च किया है।  यह भारत की वंचित महिलाओं के लिए ‘स्वच्छता, स्वास्थ्य और सुविधा’ सुनिश्चित करने हेतु शुरू किया गया एक  किफायती सैनिटरी नैपकिन है।

अन्य संबंधित योजनाएं

रजोधर्म स्वच्छता योजना (Menstrual Hygiene Scheme: MHS)

  •  यह योजना राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के एक भाग के रूप में स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित की जा रही है।
  • यह प्राथमिक रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली किशोर लड़कियों के मध्य सब्सिडी वाले सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराती है।
  • लक्ष्य : 20 राज्यों के 152 जिलों में 10 से 19 वर्ष की आयु की 15 मिलियन लड़कियों तक पहुंच सुनिश्चित करना।

रजोधर्म स्वच्छता प्रबंधन राष्ट्रीय दिशानिर्देश, 2015 (Menstrual Hygiene Management National Guidelines, 2015)

  • पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय द्वारा जारी किये गए।
  • इनके तहत स्कूलों में किशोर लड़कियों को रजोधर्म स्वच्छता प्रबंधन विकल्पों और रजोधर्म स्वच्छता प्रबंधन अवसंरचना प्रदान करने के पहलुओं के साथ रजोधर्म अपशिष्ट के सुरक्षित निपटान को शामिल किया गया है।

राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (Rashtriya Madhyamik Shiksha Abhiyan)

  • मानव संसाधन विकास मंत्रालय की इस केन्द्र प्रायोजित योजना के तहत, स्कूलों और लड़कियों के छात्रावासों में | सैनिटरी पैड प्रदान किए जाते हैं।

प्रोजेक्ट स्त्री स्वाभिमान-

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MelTY) ने स्त्री स्वाभिमान नामक एक परियोजना की घोषणा की है। ० इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में किशोरियों एवं महिलाओं की किफायती स्वच्छता उत्पादों तक पहुंच सुनिश्चित करने के
लिए एक संधारणीय मॉडल का निर्माण करना है।

ऑनलाइन पोर्टल ‘नारी’ और ‘ई-संवाद’

  •  नारी पोर्टल – यह राष्ट्रीय ई-शासन योजना के तहत एक मिशन मोड प्रोजेक्ट है (इसे इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना
    प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) द्वारा डिजाइन एवं विकसित किया गया है)।
  • ई-संवाद पोर्टल- यह गैर-सरकारी संगठनों और नागरिक समाज के लिए एक मंच है जिसके माध्यम से ये अपने सुझाव,
    शिकायतें, सर्वोत्तम प्रथाओं आदि को साझा करने के साथ महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (MWCD) के साथ वार्ता
    करते हैं।

 

महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए मिशन – हाल ही में मंत्रिमंडल ने इसके विस्तार की स्वीकृति दी है और प्रधानमंत्री महिला शक्ति केंद्र की एक नई योजना प्रस्तावित की है।

महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए मिशन

(Mission for Protection and Empowerment for Women)

उद्देश्य: विभिन्न मंत्रालयों / भारत सरकार के विभिन्न विभागों के साथ-साथ राज्य सरकारों की योजनाओं / कार्यक्रमों के अभिसरण के माध्यम से महिलाओं के समग्र सशक्तिकरण को प्राप्त करना। यह निम्नलिखित मामलों में विशेषज्ञ और तकनीकी सहायता प्रदान करता है;

  • गरीबी उन्मूलन आर्थिक सशक्तिकरण,
  • स्वास्थ्य और पोषण,
  • लैंगिक बजटिंग और लैंगिक मुख्यधारा में समावेशन,
  • लैंगिक अधिकार, लिंग आधारित हिंसा और कानून प्रवर्तन,
  • कमजोर और हाशिए पर स्थित समूहों का सशक्तिकरण,
  • सामाजिक सशक्तिकरण और शिक्षा
  • मीडिया और समर्थन और
  • सूचना प्रौद्योगिकी

नोडल एजेंसी: महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (Ministry of Women and Child Development: MWCD)

कवरेज क्षेत्र: महिलाओं हेतु राज्य संसाधन केंद्रों (State Resource Centre for Women: SRCws) के माध्यम से इस योजना के तहत सभी राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों को सम्मिलित किया जाएगा।

इसे राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों और कार्यान्वयन एजेंसियों के माध्यम से कार्यान्वित किया गया है।

महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए मिशन के संबंध में

  • यह महिलाओं की देखभाल, सुरक्षा और विकास के लिए सामाजिक क्षेत्रक की एक कल्याणकारी योजना है।
  • इसका उद्देश्य बाल लिंगानुपात में आ रही गिरावट में सुधार लाना; बालिका शिशुओं का जीवित बने रहना सुनिश्चित
    करना और उनकी सुरक्षा करना; उनकी शिक्षा सुनिश्चित करना और उनकी संभावनाओं को पूरा करने हेतु उन्हें सशक्त
    बनाना है।

प्रधानमंत्री महिला शक्ति केंद्र (Pradhan Mantri Mahila Shakti Kendra: PMSSK)

  •  उद्देश्य: ग्रामीण महिलाओं को, उनके अधिकारों का लाभ उठाने और प्रशिक्षण तथा क्षमता निर्माण के माध्यम से उन्हें
    सशक्त बनाने के लिए सरकार से संपर्क स्थापित करने हेतु एक इंटरफेस उपलब्ध कराना।
  • PMSSK ब्लॉक स्तर की पहल: इसके तहत छात्र स्वयंसेवकों के माध्यम से 115 सर्वाधिक पिछड़े जिलों में सामुदायिक
    भागीदारी की परिकल्पना की गई है।

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